आखिरी मंज़िल आखिरी मंज़िल
विधाता क्यों फिर नारी बनाई, हर घर जब होती है पराई। विधाता क्यों फिर नारी बनाई, हर घर जब होती है पराई।
फासलों का ख्याल है जिन्हें, उनमें ही दूरियाँ बढ़ती जा रही है। फासलों का ख्याल है जिन्हें, उनमें ही दूरियाँ बढ़ती जा रही है।
क्या लेकर आए थे क़िस्मत क्या लेकर जाएंगे अपने कर्म बस यही ज़िन्दगी हैं। क्या लेकर आए थे क़िस्मत क्या लेकर जाएंगे अपने कर्म बस यही ज़िन्दगी हैं।
जब भी तुम ससुराल जाते हो, नेग और तोहफे पाते हो, मुझे तो घर की लक्ष्मी कह कह कर सब खोटे सिक्के सा ... जब भी तुम ससुराल जाते हो, नेग और तोहफे पाते हो, मुझे तो घर की लक्ष्मी कह कह कर...
तो ससुराल वाले क्या समझेंगे यह सोच कर कहते हुए सासु माँ जोर से हँस पड़ीं।पूछा जाना है आगे पढ़ने?... तो ससुराल वाले क्या समझेंगे यह सोच कर कहते हुए सासु माँ जोर से हँस पड़ीं।पू...